बिहार के लाल ने महाराष्ट्र में दिखाया कमाल, 14 वीं राष्ट्रीय ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक

हमारे बिहार (bihar) की प्रतिभा पुरे देश में हमेशा से अब्बल रहा है. आपको बता दे की महाराष्ट्र के शिर्डी में 24 से 26 दिसंबर तक आयोजित 14 वीं राष्ट्रीय ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में बिहार के बेतिया के लुकेश कुमार ने 84 किलोग्राम वर्ग में उड़ीसा के खिलाड़ी को हराकर फाइनल में स्वर्ण पदक जीता है। बता दे की बिहार के लुकेश बेतिया के सिकटा प्रखंड के धनकुटवा गांव के निवासी हैं। लुकेश की माता उमा देवी पिता बलराम दास की तीसरी संतान है।

9 बिहार बटालियन के जवान हैं लुकेश : जानकारी के अनुसार तीन भाइयों में छोटे लुकेश वर्तमान में दानापुर बीआरसी, 9 बिहार बटालियन के जवान है । लुकेश के सफलता पर उनके गांव में हर्ष का माहौल है। लुकेश के पिता भी जम्मू में आर्मी में ही तैनात हैं और पुत्र की सफलता पर छुट्टी लेकर गांव लौट रहे हैं। लुकेश ने अपने सफलता पर बताया कि सेमीफाइनल में हमारा मुकाबला हरियाणा के खिलाड़ी से था, पर अपने आर्मी के सीओ कर्नल राजेंद्र प्रसाद के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से जीत हासिल करता चला गया।

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बताया जा रहा है की खेल की तकनीकी जानकारी बिहार ग्रेपलिंग संघ के सुबोध कुमार यादव के द्वारा मिली और उनके नेतृत्व में हमें काफी लाभ मिला। बिहार ग्रेपलिंग डेवलपमेंट कमिटी के चेयरमैन हरिओम उत्तम ने बताया कि इस सफलता के बाद अंतरराष्ट्रीय ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने का भी मौका लुकेश कुमार को मिला है।

भीम और जरासंध खेलते थे ग्रेपलिंग : उन्होंने यह भी बताया कि ग्रेपलिंग भारत का लगभग 5000 साल पुराना खेल है, जिसे हिंदी में मल्लयुद्ध कहते हैं। महाभारत काल में जरासंध और भीम यही खेल खेलते थे। इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप में बिहार के खिलाड़यिों ने देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया। पहले स्थान पर महाराष्ट्र और दूसरे स्थान पर तमिलनाडु रही। बिहार की झोली में 29 स्वर्ण 10 रजत और 12 कांस्य पदक आये।

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