88 साल बाद रेल नेटवर्क से एक होगा म‍िथिलांचल, 100 KM कम हो जाएगी झंझारपुर से सहरसा की दूरी

मिथिला वासियों के लिए यह हब बहुत ही खुशी की खबर है. बता दे की बीते शनिवार को झंझारपुर (मधुबनी) से सुपौल होते हुए सहरसा के बीच रेल सेवा की शुरुआत हुई है। इससे 88 साल बाद मिथिला के दोनों हिस्से फिर से रेल के जरिये जुड़ गये हैं।


आपको बता दे की 1887 में निर्मित कोसी रेल पुल के 1934 के भूकंप में ध्वस्त होने से मधुबनी से सुपौल का संपर्क टूट गया था। इस कारण दरभंगा, मधुबनी के लोगों को समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया होकर सुपौल जाना पड़ता था, जिसमें काफी वक्त लगता था। खास बात यह है की दो भाग में बंटे मिथिला को एक करने के उद्देश्य से 6 जून 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार ने मिथिलावासियों को कोसी महासेतु की सौगात दी थी।


आपके जानकारी के लिए बता दे की केंद्र की मोदी सरकार के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनने के बाद इस परियोजना के कार्य को गति मिली और 18 सितंबर 2020 को कोसी रेल महासेतु का उद्घाटन हुआ। इसके बाद झंझारपुर एवं निर्मली के बीच रेलखंड का आमान परिवर्तन किया गया तथा निर्मली और आसनपुर कुपहा के बीच नई रेल लाइन बिछाई गई। दोनों रेल लाइनों का भी आज ही उद्घाटन हुआ है और इसके साथ ही इस नये रेलखंड पर आज ट्रेन सेवा की शुरुआत भी हो गई है।