IIT मद्रास की नायाब खोज, पुरानी और ख़राब हो चुकी तस्वीरों को फिर से नई करने की तकनीक

IIT मद्रास के शोधकर्ताओं द्वारा ऐसी तकनीक तैयार की गई जिसकी मदद से सीसीटीवी में कैप्चर हुई खराब तस्वीरों को फिर से सही किया जा सकता है. इसके लिए ये शोधकर्ता आर्टिफ़िशियल न्यूरल नेटवर्क की शक्ति का उपयोग करेंगे. इससे उन तस्वीरों को सही किया जा सकेगा जो बारिश, धूप जैसी मौसमी स्थिति के कारण खराब हो जाती हैं .

प्रकाशित जर्नल में बताया गया कि यह तकनीक डॉ. ए. एन. राजगोपालन के दिमाग की उपज है. राजगोपालन आईआईटी मद्रास के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज के चेयरपर्सन पद पर हैं. इस प्रयोग में आईआईटी मद्रास के मैत्रेय सुइन और कुलदीप पुरोहित ने इनकी मदद की है. राजगोपालन की इमेज प्रोसेसिंग और कंप्यूटर विजन प्रयोगशाला में आर्टिफ़िशियल न्यूरल नेटवर्क की पावर से खराब हुई तस्वीरों को दोबारा से सही किया जाएगा. इस नई तकनीक का इस्तेमाल बारिश की धारियों, बारिश की बूंदों, धुंध आदि के कारण खराब हुई तस्वीरों को फिर से साफ करने में किया जाएगा.

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इस तकनीक के प्रयोग के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि एक सिंगल न्यूरल नेटवर्क के लिए तस्वीर के खराब हिस्सों को सही कर पाना संभव नहीं होगा, इसलिए यह फ़ैसला लिया गया कि इस काम को दो अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा. इसके पहले स्टेज में एक न्यूरल नेटवर्क तस्वीर के खराब हिस्से को सीमित रखेगा तथा दूसरे स्टेज में यूरल नेटवर्क तस्वीर को दुरुस्त करेगा. डॉ राजगोपालन इस संबंध में बताते हैं कि बारिश और धुंध जैसी मौसमी खराबी के कारण तस्वीर की गुणवत्ता को बहुत नुकसान होता है.

फ़िलहाल तो यह तकनीक केवल सीसीटीवी की खराब तस्वीरों को फिर से साफ़ करने के लिए तैयार की गई है लेकिन यह देखना रोमांचक होगा कि क्या भविष्य में इस तकनीक द्वारा कैमरे से ली गई उन तस्वीरों को भी साफ़ किया जा सकेगा, जो समय के साथ खराब हो जाती हैं. अगर ऐसा होता है तो बहुत से लोगों की वे पुरानी यादें फिर से ताज़ा हो जाएंगी जो उन्होंने सालों पहले कैमरे में कैद करने की कोशिश की थी.

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