बचपन में ही आई घर की जिम्मदारी, पिता नहीं थे, माँ करती थी खेतों में काम, बेटे ने JEE Mains क्लियर किया

जिंदगी मे बहुत मुसीबतें आती है, मुसीबतें को देखकर घबराना नहीं चाहिए, बल्कि मुसीबतें से डटकर सामना करना चाहिए, तभी सफलता पा सकते है. ऐसा ही कुछ प्रयागराज के दलित युवक धीरज कुमार की कहानी है. उन्होने पिता के खोने के बाद भी हिम्मत नही हरी और अपने मेहनत से आज JEE Men’s की परीक्षा पास कर ली.

यह कहानी प्रयागराज के धीरज कुमार का है. जिनके बचपन में सिर से पिता का साया उठ गया. उनकी मां ने खेत में काम कर उनको पढाया लिखाया . धीरज ने भी अपने मेहनत से जेईई मेंस की परीक्षा पास कर लिया. उन्हें हाल ही में इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड रूरल टेक्नोलॉजी प्रयागराज की कंप्यूटर साइंस शाखा में उनके JEE Men’s के रैंक के आधार पर प्रवेश मिल गया.

Credit : Google Images

धीरज कुमार बताते हैं कि वह अपने पिता को बचपन में ही खो दिए थे. उनकी मां घर को चलाने के लिए खेतों में काम करती थी. उनकी मां ने उसे कई मुश्किलों से पढ़ाया. धीरज अपना पैतृक घर हरभपुर,फूलपुर गांव को 4 साल पहले छोड़ प्रयागराज चल गए. धीरज प्रयागराज में ही नवमी से 12वीं तक की पढ़ाई की.

धीरज अपने सफलता का श्रेय अपने गांव के शिक्षक को देते हैं. जो कि उन्हें आर्थिक रूप से खूब सहायता किए थे. धीरज के तेज दिमाग को देखते हुए फूलपुर गांव के शिक्षकों ने राजकीय इंटर कॉलेज प्रयागराज में नवमी कक्षा में दाखिला ले लिया. जहां उन्हें दसवीं कक्षा में 84% और 12वीं कक्षा में 75% अंक हासिल हुए. संस्था के मुखिया ने उनकी सारी आर्थिक जिम्मेदारी संभाली और कॉलेज में फीस के लिए रुपए तक जमा किए धीरज को प्रवेश में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा . स्कूल और अन्य लोगों ने ₹63000 देकर आईई आरटी में सीट दिलवाने में मदद की.