माँ दुसरे के कपडे धोती थी, भला कौन बेटा माँ को मजदूरी करते देख सकता है, बेटा बना अफ़सर, प्रेरणा

अगर इंसान चाहे तो, उनके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है. इसी का उदाहरण एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे मुना सेठी ने पेश किया है. जो इतनी गरीबी के बावजूद भी अपनी मेहनत से ओडिशा सिविल सर्विसेज सेवा की परीक्षा पास की. बता दें घर में पैसों की इतनी कमी थी की मुना सेठी की माँ दुसरे के यहाँ कपडे धोती थी. भला ये किस बेटा को अच्छा लगेगा की माँ दुसरे के यहाँ काम करती है. इसी लिए मुना सेठी ने जीवन में कुछ करने का ठाना.

मुना सेठी के ढेंकनाल जिले, परजंग ब्लॉक के अंतर्गत पतरपाड़ा पंचायत में कटबहल गांव के रहने वाले छात्र है . उनके पिता एक दिहारी मजदूर थे. उनके पिता का नाम रविंद्र सेठी और माता का नाम बसंती सेठी है. मुना सेठी की मां ने परिवार के खर्च चलाने के लिए लोगों का कपडे भी धोए. क्योकि घर की स्थिति खराब होने के कारण पिता की मजदूरी से परिवार चलना मुश्किल पड़ रहा था.

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मुना शुरुआत से ही एक मेधावी छात्र रहे है. उसने प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से ही पांचवी कक्षा तक पढ़ाई की, इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय सारंग में दाखिला लिया और 12वीं तक पढ़ाई वही से किया. आगे की पढाई यानि स्नातक की डिग्री रेनशॉ विश्वविद्यालय से किया . मुना ने पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए विश्वविद्यालय में दाखिला लिया. लेकिन उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य समस्या के कारण पढ़ाई छो दी.

साल 2016 से गांव में रहकर अपने परिवार की आय बढ़ाने के लिए मुना सेठी प्राइवेट ट्यूशन देने लगे. साथ ही साथ वो सरकारी नौकरी की तैयारी करने लगे. मुना ने चौथे प्रयास में अपना मुकाम हासिल किया. पहले प्रयास में प्रीलिम भी पास नहीं कर सके थे. और दूसरे और तीसरे प्रयास में मेन्स पास नहीं कर पाए, लेकिन चौथी बार में ओडिशा सिविल परीक्षा पास कर 76वी रैंक लाकर मुना अपने गांव और मोहल्ले का नाम रोशन किया.