बिहार में 300 करोड़ की लागत से बन रहा सुपर पावर ग्रिड, बिहार से विदेश सप्लाई होगी बिजली

BIHAR :- बिहार में डीजल से संचालित जेनरेटर से बिजली उत्पादन करने वाले बिहार के कटिहार जिले में अब उच्च क्षमता का पावर ग्रिड कोढ़ा प्रखंड में बनाया जाएगा। 300 करोड़ की लागत से सुपर पावर ग्रिड का निर्माण होने के बाद बिहार के कोसी, सीमांचल सहित पड़ोसी देश बांग्लादेश को भी इस पावर ग्रिड से बिजली सप्लाई की जाएगी। 1957 में 660 किलोवाट क्षमता वाले डीजल आधारित बिजली घर शहर के बिनोदपुर में स्थापित की गई थी।

बिहार के इस बिजली घर से मार्च 1957 में बिजली उत्पादन व आपूर्ति का काम हुआ था। बिहार के पूर्णिया जिला मुख्यालय तक बिजली ले जाने के लिए 11 हजार वोल्ट का तार लगाया गया था। इससे बिहार के कटिहार और बिहार के पूर्णिया जिलो के कुछ खास इलाके में बिजली आपूर्ति की जाती थी। द्वितीय पंचवर्षीय योजना में 330 किलोवाट क्षमता वाला बिजली घर किशनगंज एवं 1960 में फारबिसगंज में भी स्थापित की गई। बिहार के कटिहार जिलो से बनमनखी को बिजली आपूर्ति के लिए बिहार के इस बिजलीघर की क्षमता 25 सौ किलोवाट तक बढ़ाई गयी थी। डीजल आधारित उच्च क्षमता वाले बिहार के कटिहार बिजली घर में 10 यूनिट लगाए गए थे।

यह भी पढ़ें  बिहार में सभी चौक चौराहों पर ब्रेथ एनालाइजर से होगी शराबियों की जांच

इसका मकसद किसी भी समय कम से कम छह यूनिट को चालू रखना था। लोड के अनुसार जरूरत होने पर सभी 10 यूनिट को भी चालू किया जाता था, ताकि उपभोक्ताओं को सुचारू रूप से बिजली की आपूर्ति होती रहे। पावर हाउस परिसर में रखा हाई पावर जेनरेटर आज भी अतीत की यादों को ताजा कराता है। जेनरेटर आधारित बिजली घर में 40 कर्मी की पदस्थापना की गई थी। एक यूनिट के संचालन में लगभग 35 से 40 लीटर डीजल प्रति घंटा की खपत होती थी । यहां से मिलने वाली बिजली से कई उद्योग धंधे भी चलते थे। 1987 में डीजल से संचालित पावर हाउस में तकनीकी खराबी आने के बाद इसे बंद कर दिया गया।

यह भी पढ़ें  बिहार में अब मद्य निषेध कानून के तहत जब्त वाहनों की होगी अब इ-नीलामी, जानिये ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया...

इसी दौरान बरौनी थर्मल पावर स्टेशन से बिहार के कटिहार को बिजली आपूर्ति होने लगी। इस स्थिति में थर्मल पावर से आपूर्ति बाधित होने पर जेनरेटर आधारित बिहार के बिजली घर के कुछ यूनिट के जरिए आपूर्ति की कोशिश होती थी। अधिक लागत व मांग के अनुरुप उत्पादन नहीं होने के कारण धीरे-धीरे इसे बंद कर दिया गया।