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खूब लड़ी मर्दानी, वो तो झांसी वाली रानी थी, लक्ष्मीबाई के स्वरूप में दिखी आंचल

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भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की महानायिका झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि शुक्रवार को पटना सहित पूरे देश भर में मनाई गई. आज जिले के कोने-कोने से अनेक लोगों ने विभिन्न स्थानों पर झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की.

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इस बलिदान दिवस पर आंचल सिंह ने नारी शक्ति की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई के स्वरूप धारण कर लोगों को उनके प्रति आकर्षित किया “खूब लड़ी मर्दानी, वो तो झांसी वाली रानी थी” उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में अपने सौंदर्य, शौर्य और साहस की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई केवल महिलाओं ही नहीं पुरुषों के लिए भी प्रेरणा स्रोत मानी जाती हैं. इस मौके पर समाजसेवी अंजू सिंह ने कहा कि नारी शक्ति की अप्रतिम प्रतीक झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जी को उनकी पुण्यतिथि पर  श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं, आपका बलिदानी जीवन प्रत्येक भारतीय के लिए महान प्रेरणा है.

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1858 में आज ही के दिन दिया था बलिदान-

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देश के प्रथम स्‍वतंत्रता संग्राम की वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म 18 नवम्बर 1828 को हुआ था. उन्‍होंने 18 जून 1858 को अपना बलिदान दिया। इस दिन को देश रानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस के रूप मनाता है. इतिहास के पन्‍नों में रानी की वीरगाथा सुनहरे अक्षरों में अंकित है.

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अपने जीवन की अंतिम लड़ाई में उन्‍होंने ऐसी वीरता दिखाई कि अंग्रेज तक उनके कायल हो गए. उनके बलिदानी जीवन से आज भी देश प्रेरणा लेता है. उन्‍होंने बड़ी वीरता से अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे. वह अंतिम सांस तक अंग्रेजों से लड़ती रहीं और अंतत: वीर गति प्राप्‍त की।

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