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तरबूज नाम सुनते ही ऐसा लगता है की लाल लाल गुदे नजरों के सामने आ जाते हैं और मूंह में पानी आना तो लाजिमी है खास कर गर्मियों के मौसम में तरबूज खाने का अलग ही मजा है तरबूज की खेती आमतौर पर नदियों के किनारे होती है. यह खेती किसानों को कम खाद और कम पानी में अच्छी फसल मिल जाती है. तरबूज की खेती मुख्यौतर पर राजस्थान, पंजाब, हरियाणा आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार सहित कई प्रदेशों में इसकी फसल लगाई जाती है.

आज हम आपको जिस शक्स के बारे में बताने जा रहे हैं उन्होंने सैनिक स्कूल में पढ़ाई तो की लेकिन सेवा के लिए उन्होंने मिट्टी को चुना। उन्होंने खेती को अपना करियर बनाया। हम बात कर रहे है रोहित की जो बिहार के हाजीपुर से संबंध रखते हैं। इन्होंने अपनी शिक्षा सैनिक स्कूल से ग्रहण की है। लेकिन उन्होंने फौज में जाने के बजाय खेती की शुरुआत की। आज वह 150 एकड़ में खेती करने के साथ-साथ 200 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

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जानकारी के लिए बता दे की बिहार के रोहित खेती के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। बिहार के रोहित उन किसानों की सोंच को बदला जो पारंपरिक खेती को अपना सहारा मान कर खेती किया करते थे। रोहित ने जो कार्य किया वह पूरी इमानदारी और मेहनत से किया इसीलिए आज वह प्रत्येक सीजन में लगभग 100 टन से भी अधिक तरबूजे बेचकर उससे 40 लाख का मुनाफा कमा रहे हैं।

बिहार के रोहित बताते है की वह अपने खेतों में खरबूज ही नहीं बल्कि खीरे और केले भी उगाए हैं। रोहित सिंचाई के लिए ड्रिप तकनीक का उपयोग करते हैं ताकि जल का संरक्षण हो सके। रोहित अब अपने फसलों की देखभाल लगभग 8-10 घंटे करते हैं। रोहित का मानना है कि खेती करने से कुछ नहीं होगा इसके लिए हमें उसकी मार्केटिंग भी आवश्यक है। वह अपने खरबूज झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य शहरों में उत्पादित करते हैं। रोहित ने बताया कि अभी तो इन्होंने अपने खेती की शुरुआत हीं की है आगे उन्हें अपनी जिंदगी में बहुत कुछ करना है।

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