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ये 21 वीं सदी है। इसमें कुछ भी असंभव नहीं है। अभी के समय में जहा बेटियों का पैदा होना अब भी आभिशाप माना जाता है। वहाँ आज भी बेटियों को समाज की नजरों से छुपा कर रखा जाता है। लेकिन आज हम आपको जिसकी कहानी बताने जा रहे हैं वह ग़ज़ब की है। दुनिया इस परिवार से बहुत कुछ सीखना चाहती है। इसके बारे में जानना चाहती है। बेटियों ने खुद अपनी काबिलियत को पहचाना और आगे बढ़कर मुकाम हासिल किया। आज बेटियों की काबिलियत को बिहार सरकार ने सलाम किया है। अब उनको समाज सुधार का काम दे रही है। एक, दो नहीं बल्कि बिहार की 347 बेटियों का चयन इसके लिए किया गया है।

अपने बूते लीक से हट कर काम किया : पटना सहित बिहार भर के माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल की छात्राओं का चयन हुआ है। इन बेटियों को बिहार सरकार की विभिन्न योजनाओं में शामिल किया गया है। हाल में समाज कल्याण विभाग ने समाज सुधार अभियान के तहत उड़ान प्रोजेक्ट में महादेव हाई स्कूल खुसरूपुर की तीन छात्राओं गुड़िया, निर्जला और आयुषी राज को शामिल किया है। वहीं, उच्च विद्यालय बेगूसराय की छात्रा प्रियंका कुमारी को भी अभियान में जगह मिली है।

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जानकारी के लिए बता दे की बिहार सरकार के विभिन्न विभागों ने मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल से उन बेटियों की सूची मांगी थी, जिन्होंने अपने बूते लीक से हट कर काम किया है। समाज को आगे बढ़ाने और समाज की सोच बदलने के लिए जिन बेटियों का योगदान रहा, उनका चयन किया गया है। छात्राओं का चयन होने के बाद अगस्त और सितंबर में संबंधित विभाग द्वारा शूटिंग की गयी। शूटिंग के बाद इन्हें संबंधित विभाग अपने बैनर में जगह दे रहे हैं।

इस तरह कर रहीं अन्य बेटियों को प्रोत्साहित

  • हक से कहो, मैं आगे पढ़ूंगी
  • डरो मत, अपने हक को लेना जानो
  • पढ़ने से ही हम आगे बढ़ेंगे
  • हम पढ़ेंगे तभी आगे बढ़ेंगे
  • अपने पैरों पर खड़े होकर माता-पिता का सहारा बनेंगे
  • आत्मनिर्भर होकर अपना कल खुद लिखेंगे
  • खुद अपना सपना साकार करेंगा
  • खुद से है प्यार तो नहीं करना पढ़ने से इनकार
  • लड़की होने से मान बढ़ेगा

मिशाल 1

  • महादेव हाई स्कूल खुसरुपुर की नौंवी की छात्रा निर्जला कुमारी 29वें बाल विज्ञान कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर जगह बना चुकी हैं। उसके
  • आत्मनिर्भर भारत के तहत निर्जला कई बार पुरस्कृत हो चुकी है।

मिशाल 2

  • हाई स्कूल चकबेरिया की छात्रा आयुषी राज में पढ़ाई के साथ नृत्य सीखने की ललक थी। लेकिन परिवार वाले तैयार नहीं थे। आयुषी राज
  • परिवार को बताए बिना नृत्य सीखने लगी। पिता को मनाने लगी। आज आयुषी नृत्य के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी है।

मिशाल 3

  • छात्रा मीरा कुमारी के पिता ने उसकी शादी कम उम्र में करनी चाही। लेकिन उसने इसका विरोध किया और शादी करने से इनकार कर दिया। आज मीरा दसवीं में पढ़ रही है।

आत्मनिर्भरता की सीख दे रहीं : बता दे की बेटियां आत्मनिर्भर होने की सीख दे रही हैं। न झुकना है, न पीछे मुड़ कर देखना है, बस आगे बढ़ना है। महादेव हाईस्कूल खुसरूपुर की शिक्षिका निशि कुमारी कहती हैं कि बैनर में नाम व फोटो आने से बेटियों में आगे बढ़ने की ललक जगी है।

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