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बिहार में बिजली परियोजनाओं को गति देने के लिए बिहार सरकार ने उच्चस्तरीय समिति बनाई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी यह समिति राज्य की बिजली परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करेगी। साथ ही उपभोक्ता हित में कार्ययोजना बनाकर उसका क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करेगी।

आपको बता दे की बिहार सरकार ने इस समिति का गठन रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) -एक रिफॉर्म्स बेस्ड एंड रिजल्ट्स लिंक्ड स्कीम के तहत किया गया है। ऊर्जा विभाग की ओर से गठित समिति का नाम डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म कमेटी (डीआरसी) दिया गया है। बता दे की इस समिति का अध्यक्ष मुख्य सचिव को बनाया गया है, जबकि सदस्य के तौर पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव या अपर मुख्य सचिव, वित्त विभाग के प्रधान सचिव या अपर मुख्य सचिव और पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव या सचिव को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है। जबकि ऊर्जा विभाग के सचिव या प्रधान सचिव इस समिति के संयोजक होंगे।

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बताया जा रहा है की समिति गठन के साथ ही इसके उद्देश्यों को भी सरकार ने साफ कर दिया है। यह समिति राज्यस्तर पर योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेगी। राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी को जाने वाली योजनाओं (एक्शन प्लान) की अनुशंसा करेगी। मॉनिटरिंग कमेटी की स्वीकृति हेतु डीपीआर की अनुशंसा और नोडल एजेंसी की सहमति से क्रियान्वयन के तरीके में बदलाव की स्वीकृति का काम भी इस समिति का होगा। कार्ययोजना के कार्यान्वयन की समीक्षा भी यह समिति समय-समय पर करेगी। जबकि बिजली परियोजनाओं की भौतिक व वित्तीय प्रगति के साथ गुणवत्ता की समीक्षा भी डीआरसी के जिम्मे होगा।

जानकारी के लिए बता दे की देश में बिजली वितरण-संचरण व्यवस्था सुधारने के लिए केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में तीन लाख करोड़ खर्च करने की आरडीएसएस योजना घोषित हुई है। इसमें से बिहार ने केंद्र सरकार से 23 हजार करोड़ की मांग की है। आधारभूत संरचनाओं के लिए 12 हजार करोड़ तो सभी उपभोक्ताओं को स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाने के मद में 11 हजार 100 करोड़ खर्च होंगे। इन परियोजनाओं के पूरा होने से कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। साथ ही तकनीकी व व्यावसायिक नुकसान को भी कम किया जा सकेगा। इन परियोजनाओं की डीपीआर बिजली कंपनियों की ओर से तैयार की जा रही है जो जल्द ही केंद्र को सौंपी जाएगी।

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